हींग के औषधीय गुणों के बारे में जानें

heeng ke fayade

हींग का उपयोग विशेष दाल, साग को छौंकने में होता है| परतू अनेक रोगों के निवारण में भी ये बहुत कारगर है| इसके सेवन से कफ, वायु दोष नहीं होते| हींग का प्रयोग सदेव उचित मात्रा में करना चाहिए| यह बहुत लाभकारी है| इसके अनेक औषधीय गुण हैं|

हींग के घरेलू उपायों से इन 12 तरह के विकारों को दूर करें:

1.   कान दर्द: दो चम्मच सरसों के तेल में एक ग्राम हींग, दो काली लहसुन, और ज़रा सा सेंधा नमक भून लें| जब हींग जल जाये तो तेल को छानकर शीशी में भरकर रख लें| कान में दर्द सा सायें-सायें होने पर दो-दो बूंद रोज़ रात को कानो में डालें| दूसरे दिन कान साफ करने के बाद ही तेल डालें| हर रोज़ एक सप्ताह तक ऐसा करने से कान दर्द खुश्की, और सायें-सायें की आवाज़ की शिकायत दूर हो जाती है|

2.   कुकुर खांसी: हींग को घी में भून लीजिये, काली मिर्च, वायबिडग, कूठ, सेंधा नमक और भुनी हुयी हींग, सभी 5-5 ग्राम लेकर कूट-पीस के, छान कर शीशी में भर लें| कुकुर खांसी होने पर आधा या एक ग्राम चूर्ण शहद में मिलाकर सुबह-शाम चाटें| यह नुस्खा सिर्फ एक हफ्ते में ही चमत्कार दिखा देता है|

3.   कौड़ी (गिल्टी) का दर्द: एक बीज निकाला हुआ मुनक्का लेकर उसमें दो ग्राम भुनी हींग मिलाकर चबा जाइये| ऊपर से दो घूंट गरम पानी पी लें असर होते देर नहीं लगेगी|  दूसरे दिन एस दावा की एक खुराक ले लीजिये रोग हमेशा के लिए खत्म हो जाएगा|

4.   कब्ज: हींग, सौंठ और मुलेठी दो-दो ग्राम लेकर पीस लें फिर मधु (शहद) मिलाकर चने के बराबर गोलियां बना लें| फिर भोजन के बाद एक गोली सुबह और एक गोली रात को चुसिए| कब्ज से राहत मिलेगी|

5.   कफ विकार: हींग को शराब में खरल करके सूखा लीजिये इसे दो रत्ती मक्खन के साथ खाने से खांसी, स्वास और दूषित कफ विकार में अत्यंत लाभ होता है|

6.   पतली दस्त: हींग, काली मिर्च और कपूर प्रत्येक 10-10 ग्राम और अफीम 4 ग्राम लेकर अदरक के रस में 6 घंटे तक घोटिए, फिर एक-एक रत्ती की गोलियां बनाइये| एक या दो गोली दिन में तीन बार लेने से दस्त से छुटकारा मिलता है|

7.   हैजा: हींग, कपूर और आम की गुठली समभाग में लेकर पुदीने के रस में पीसकर चने के बराबर गोलियां बना लें| 4-4 घंटे पर ये गोली देने से हैजे में फायदा होता है|

8.   प्रसूता (प्रेगनेंट) को चक्कर: घी में सेंकी हुयी हींग, घी के साथ खाने से प्रेगनेंट स्त्री को आने वाला चक्कर, सर चकराना और आने वाला शूल मिटता है|

9.   नारु: हींग का चार माशा चूर्ण, बीस टोले दही में मिलाकर पीने से और दोपहर को केवल दहि भात खाने से या सिर्फ दहि सेवन करने से तीन दिन में ही नारु बाहर निकाल आता है|

10. पेट में गैस: पेट में गैस हो गयी हो, पेट फूल कर ढोल के समान बन गया हो, पेट में दर्द हो रहा हो तो नाभि के आस-पास और पेट पर हींग का लेप करने से थोड़े समय मेनन ही आराम हो जाता है|

11. कंठ माल: हींग और अफीम बराबर-बराबर लेकर तिल के तेल या मोम और तेल में अच्छी तरह पीसें यह मलहम कंठ माल पर लगाने से कंठमाल (गले की ग्रंथियाँ बढ़ जाती हैं और ऐसा लगता है की माला बन गयी है जिस वजह से इस रोग को कंठमाला कहते हैं) पक कर फूट जाता है और आराम मिलता है|12. दाँत दर्द: हींग को पानी में उबाल कर उस पानी से कुल्ले करने से दाँत की पीड़ा दूर होती है| यदि दांत में कोल हो, तो कोल में हींग भरने से दंत क्रमि मर जाते हैं और दाँत की पीड़ा दूर हो जाती है|

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