क्या होता है साइटिका? जानें साइटिका के बारे में

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सिएटिक नर्व आपकी रीढ़ की हड्डी से शुरू होती है और आपके कूल्हों से होते हुए दोनों पैरो में नीचले हिस्से की और जाती है। साइटिक नर्व हमारे शरीर की सबसे लम्बी और सबसे महत्वपूर्ण तंत्रिकाओं में से एक है। इस नर्व का प्रभावित होने से आपके पैरों को महसूस करने और नियंत्रित करने की क्षमता पर सीधा प्रभाव पड़ता है। जब भी आपकी इस तंत्रिका पे किसी प्रकार का प्रभाव पड़ता है, साइटिका की समस्या होने लगती है। 

साइटिका का दर्द आपकी पीठ, कूल्हों और पैरों में होता है, और इससे काफी ज़्यादा समस्या हो सकती है। आप इन अंगों में कमज़ोरी या सुन्नता जैसा आभास भी हो सकता है। जब साइटिका का दर्द होता है, वो आपकी रीढ़ में चोट का लक्षण होता है।

ज़्यदातर लोग जो साइटिका की समस्या से झूझते हैं,  उनकी उम्र 30 से 50 सालों के बीच में होती है।  

साइटिका के लक्षण

साइटिका के लक्षण बहुत प्रकार के होते हैं। यदि आपको पीठ के निचले हिस्से से अपने नितम्भ क्षेत्र से होते हुए आपके निचले अंगो में बहने वाले दर्द का सामना करना पड़ रहा है तो आपको साइटिका की समस्या हो सकती है। 

साइटिका आपकी साइटिक तंत्रिका पे चोट लगने या नुक्सान पहुँचने का परिणाम होता है। इसी वजह से तंत्रिका के अन्य लक्षण आमतौर कमर के दर्द के साथ होते है। इसके अन्य लक्षण होते हैं:

  • आपका दर्द हिलने डुलने से बढ़ सकता है 
  • आपके पैरों और टांगों में सुन्नता या कमज़ोरी हो सकती है। साइटिका के गंभीर मामलों में आपको अपने पैरों का हिलना डुलना भी महसूस होना बंद हो सकता है। 
  • सुई चुभने जैसा दर्द महसूस हो सकता है।  इससे आपके पैरों की उँगलियों में एक दर्दनाक झुनझुनी महसूस होना भी शामिल है।  
  • आपकी दिनचर्या भी प्रभाव पड़ता है। 

साइटिका के कारण

साइटिका की समस्या रीढ़ की हड्डियों से जुडी बहुत सारी स्तिथियों से हो सकता है। पीठ पे चोट लगना, या जेनटिक समस्या साइटिका का कारण हो सकती है। नीचे साइटिका की सामन्य कारण वर्णित है – 

  • हर्नियेटेड डिस्क – हर्नियेटेड डिस्क को स्लिप डिस्क भी बोला जाता है। आपकी कोशिकाएं आपकी रीढ़ की हड्डी कार्टिलेज से अलग हो जाती हैं। कार्टिलेज आपके शरीर में हड्डियों को एक दूसरे से टकराने से बचती हैं। हर्नियेटेड डिस्क तब होती हैं जब कार्टिलेज आपकी हड्डियों से हैट जाती हैं।  इससे आपकी स्याटिक नर्व संकुचित हो जाती हैं, जिसके परिणामस्वरूप आपकी कमर के निचले हिस्से में दर्द और सुन्नता हो जाती है।  
  • स्पाइनल स्टेनोसिस – स्पाइनल स्टेनोसिस में आपकी रीढ़ की हड्डी संकुचित होने लग जाती है। जब आपकी रीढ़ की हड्डी संकुचित होने लग जाती हैं, आपको चलने फिरने में, या घूमने में समस्या होने लग जाती है। ये संकुचन आपकी रीढ़ की स्याटिक तंत्रिका पर दबाव डालती है।  
  • स्पोंडिलोलिस्थीसिस – डिजेनेरेटिव डिस्क का एक लक्षण स्पोंडिलोलिस्थीसिस भी हो सकता है। जब एक रीढ़ की हड्डी या कशेरुक एक दूसरे के आगे बढ़ती है, तो विस्तारित रीढ़ की हड्डी आपकी स्याटिक तंत्रिका को प्रताड़ित क्र सकती है।
  • पिरिफोर्मिस सिंड्रोम – पिरिफोर्मिस सिंड्रोम एक न्यूरोमस्कुलर समस्या है, जिसमें स्याटिका के कारण आपकी पिरिफोर्मिस मासपेशियां संकुचित हो जाती हैं। जब आपकी पिरिफोर्मिस मासपेशी संकुचित हो जाती है, तो यह आपकी साइटिक तंत्रिका पर दबाव डालती है। 

साइटिका से बचाव कैसे करें? 

साइटिका और अन्य कारणों से पीढ़ दर्द काफी सामान्य है, लेकिन कई उपाय यहीं जो इस समस्या को बार बार उभरने से रोकने में मदद करता है – 

  • खड़े होने, और बैठने पर सही आसान बनाये रखें। 
  • ऐसे व्यायाम करें करें जो एरोबिक फिटनेस और पेट एवं रीढ़ की हड्डी में लचीलापन बढ़ाये। 
  • कोई भी भारी चीज़ उठाने के लिए सही तकनीक का इस्तेमाल करें। इसके लिए घुटनो को मोड़कर पीड़ को सीधा रखे। ऐसा करने से तनाव कूल्हों पे आता है, पीठ पर नहीं।  
  • जैसे बैठने पे कुर्सियों का उपयोग करें तो सुनिश्चित करें की आपकी कमर को पूरा सपोर्ट मिला हुआ है।  हमेशा ऐसी कुर्सियों का इस्तेमाल करें जो अच्छा बैक सपोर्ट प्रदान करती है।  
  • धूम्रपान न करें।
  • शरीर के वजन को एक स्वस्थ स्टार पे बनाये रखें।  

साइटिका का इलाज 

यदि आपका साइटिका का दर्द दिनचर्या के बदलाव से बेहतर नहीं होता, तो आपके डॉक्टर आपको कुछ उपचार बता सकते हैं। डॉक्टर्स के द्वारा सुझाये गए समान्य साइटिका के इलाज हैं –

  • सूजन घटने वाली दवाएं
  • नारकोटिक्स दवाएं 
  • त्रिसाइकलिक एंटी-डिप्रेसेंट 
  • शारीरिक चिकित्सा

साइटिका की समस्या को ठीक करना बहुत मुश्किल है, डॉक्टर्स के सुझाये गए हुए उपाय से दर्द काम होने की सम्भावना कम होती है।

साइटिका का दर्द कम करने के लिए (Ayurvedic Treatment for Sciatica) आयुर्वेदिक दवाइयों का उपयोग करना बेहद कारगर है। SureShot  Ayurveda की साइटिका की दवाये काफी कारगर है, क्युकी ये दवाएं समस्या के कारण की जगह, समस्या की जड़ को ठीक करती है।

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