अर्थराइटिस से जुड़े 7 मिथक के बारे में ज़रूर जानें!

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अर्थराइटिस एक ऐसी समस्या है जिसमें व्यक्ति को जोड़ों में दर्द होता है और इसके साथ जोड़ों में सूजन भी हो जाती है| लेकिन अर्थराइटिस यानि की गठिया के रोग को लेकर मिथक भी हैं जिंका दूर होना भी ज़रूरी है क्यूंकी गलत जानकारी आपकी समस्या को और बढ़ावा दे सकती है|

आज के समय की बात करें तो अर्थराइटिस केवल बूढ़े लोगों में ही नहीं बल्कि जवान और कम उम्र के लोगों में भी देखने को मिल रहा है| यहाँ तक की कुछ बच्चे भी इस रोग का शिकार हो रहे हैं|

गठिया रोग का मुख्य कारण है इनएक्टिव लाइफस्टाइल जिस कारण लोग बुढ़ापे से पहले ही बूढ़े हो रहे हैं, यानि की उन्हें वो बीमारियाँ पहले ही होने लगी हैं जो एक उम्र के बाद होती है| जो लोग शारीरिक व्यायाम न के बराबर करते हैं|

वो लोग जिनका खाने का कोई तय समय नहीं है और वे कुछ भी बाहर से खा लेते हैं या फिर जिनके आहार में ज़रूरी पोशाक तत्वों की कमी है और वे लोग जो धूम्रपान और शराब का भी सेवन करते हैं जान लें की वो एक खराब लाइफ़स्टाइल को फॉलो कर रहें हैं जो बहुत सी बीमारियों को बुलावा देता है|

इसके साथ ही इस तरह का खराब लाइफ़स्टाइल आपका वज़न बढ़ाता है जिस कारण भी आपको कई प्रकार की दिक्कतें होती और कई बार इस तरह का लाइफ़स्टाइल ही अर्थराइटिस जैसी दिक्कतों को बढ़ावा देता है|

अर्थराइटिस के कारण जान लें:

1.       खराब या इनएक्टिव लाइफस्टाइल

2.       धूम्रपान

3.       शराब

4.        जेड़ें में चेट

5.       मेटापा और शारीरिक सक्रियता की कमी

6.       अर्थराइटिस में व्यक्ति के असहनीय दर्द होता है।

7.       जोड़ों में सूजन

8.       जोड़ों में कठोरता और दर्द

9.       चलने-फिरने और उठने-बैठने में दिक्कत

अर्थराइटिस के लगभग  100 से भी ज़्यादा प्रकार हैं और इन सभी प्रकार के लक्षण, कारण और उपचार अलग-अलग होते हैं| लेकिन सबसे कॉमन अर्थराइटिस दो प्रकार के हैं जिससे सबसे ज़्यादा लोग प्रभावित होते हैं जैसे की रुमेटॉइड अर्थराइटिस और ऑस्टियोअर्थराइटिस।

1. ऑस्टियोअर्थराइटिस:

ऑस्टियोअर्थराइटिस को ओ ए भी कहा जाता है और  अर्थराइटिस का ये टाइप ज़्यादातर बढ़ती उम्र के लोगों को होता है| ऑस्टियोअर्थराइटिस में जोड़ों में सूजन, दर्द और कठोरता जैसे लक्षण दिखाई देते हैं| ऑस्टियोअर्थराइटिस व्यक्ति की रीढ़ की हड्डी, घुटने और नितंबों को जकड़ता है|

2. रुमेटॉइड अर्थराइटिस:

रुमेटॉइड अर्थराइटिस, अर्थराइटिस का एक सामान्य प्रकार है। रुमेटॉइड अर्थराइटिस आर ए भी कहा जाता है और ये अर्थराइटिस रात के समय में बढ़ जाता है| अधिकतर लोगों में देखा गया है की रुमेटॉइड अर्थराइटिस की समस्या रात को अधिक बढ़ जाती है| इसमें व्यक्ति के हाथों, जोड़ों, कलाइयों और उँगलियों में बहुत दर्द होता है|

आज हम अर्थराइटिस से जुड़े कुछ मिथकों के बारे में जानेगें ताकि लोगों में जो गलत जानकारी फैली हुयी है उसके आगे सही जानकारी का पूर्णविराम लगाया जा सके|

अर्थराइटिस से जुड़े मिथकों के बारे में जान लें:

1.   मिथक: अर्थराइटिस केवल बूढ़े लोगों को ही होता है|

सच्चाई: ज़्यादातर लोगों को यही लगता है की अर्थराइटिस जैसी समस्या केवल बूढ़े लोगों को ही होती है और यही कारण है की बहुत से यंग लोग अर्थराइटिस के लगशनों को अनदेखा कर देते हैं| ये एक बड़ा मिथक है जिसके बारे में लोगों को पता होना चाहिए क्यूंकी गठीय रोग यानि की अर्थराइटिस आपको किसी भी आयु में हो सकता है और सिर्फ यंग लोग ही नहीं बल्कि ये समस्या बच्चों में भी हो सकती है|

2.       मिथक: अर्थराइटिस का कोई इलाज इलाज नहीं होता और केवल सर्जरी ही एकमात्र विकल्प है|

सच्चाई:  बहुत से लोगों को लगता है की अर्थराइटिस का इलाज नहीं है या फिर इसे केवल सर्जरी की मदद से ही ठीक किया जा सकता है पर ये एक मिथक है| अर्थराइटिस को ठीक करने के लिए दवाइयाँ और फिजियोथेरेपिस्ट व्यायाम के जरिये दूर किया जा सकता है| लंबे समय तक दवाइयाँ देने को बजाए आहार और व्यायाम करके अर्थराइटिस के लक्षणों को दूर किया जा सकता है और इस दिक्कत में काफी हद तक सुधार भी किया जा सकता है| खासकर अगर अर्थराइटिस के लक्षण को समय रहते इलाज मिल जाये तो बिना किसी सर्जरी के भी आप इस समस्या से छुटकारा पा सकते हैं|

3.       मिथक: सभी तरह के जोड़ों का दर्द अर्थराइटिस ही होता है|

सच्चाई: ज़रूरी नहीं है की जोड़ों का दर्द है तो ये दर्द अर्थराइटिस के कारण ही हो रहा है पर ऐसा नहीं है जोड़ों के दर्द के अन्य कारण भी होते हैं| जोड़ों का दर्द इन कारणो की वजह से भी होता है जैसे, पैरों का किसी चीज़ से टकराने पर, गुथनों में कड़ापन आने की वजह से, नरम ऊतकों पर चोट लाग्ने के कारण, गलत सीजे का जूता पहने के कारण या फिर जब शरीर में पोशाक तत्वों की कमी हो जाए तब| इसलिए अगर आपको जोड़ों का दराड़ होता है तो डॉक्टर से संपर्क करें और फिर ही किसी बात को मानें|

4.       मिथक: व्यायाम जोड़ों के दर्द को बढ़ा देता है|

सच्चाई: अगर आप चाहते हैं की आप स्वस्थ रहें तो व्यायाम करना काफी लाभकारी होता है| व्यायाम आपको बहुत सारी शारीरिक दिक्कतों से बचाता है और आपको कई परकार की बीमारियों से भी बचा कर रखता है| इसलिए ये मिथक है की व्यायाम करने से अर्थराइटिस (जोड़ों का दर्द) बढ़ जाता है| बल्कि अर्थराइटिस के दर्द को कम करने लिए फिजियोथेरेपिस्ट एक्सरसाइज करवाते हैं| इसलिए अर्थराइटिस में स्ट्रेटचिंग और हल्के व्यायाम करने से लाभ मिलता है बीएस ध्यान रहे की व्यायाम सही तरीके से किया जाये|

5.   मिथक: अर्थराइटिस एक तरह की वंशानुगत दिक्कत है|

सच्चाई: कई बार लोगों को लगता है की उनके परिवार में किसी को या फिर माता-पिता में से किसी को अर्थराइटिस की दिक्कत है तो इस कारण उन्हें भी ये समस्या ज़रूर होगी| पट ये एक मिथक है, हाँ पारिवारिक इतेहास अर्थराइटिस के जोखिम को बढ़ाता है पर इसका मतलब ये नहीं की आपको अर्थराइटिस होगी ही| आपको अर्थराइटिस आलसभरी जीवनशैली, चोट, गलत खान-पान, मोटापे और कमजोर मांसपेशियों के कारण भी हो सकता है|

6.   मिथक: खट्टे खाद्य पदार्थ खाने से अर्थराइटिस का दर्द बढ़ता है।

सच्चाई: अगर बात करें खट्टा खाने से जोड़ों का दर्द बढ़ता है तो इसका कोई वैज्ञानिक आहार अभी तक सामने नहीं आया है| इसलिए खट्टी चीज़ें जैसी की दहि, नींबू, संतरा आदि खाने से पीछे न हटें क्यूंकी इन सभी चीज़ों से आपको ज़रूरी पोषण मिलता है|

7.   मिथक: अर्थराइटिस का दर्द हो तो व्यायाम नहीं करना चाहिए।

सच्चाई: ये एक भ्रम है की अर्थराइटिस का दर्द हो तो व्यायाम नहीं करना चाहिए| अगर आपको दर्द हो रहा है तो हल्के व्यायाम आराम से कर सकते हैं| आप चाहें तो हल्की स्ट्रेटचिंग भी कर सकते हैं क्यूंकी इससे आपकी मांसपेशियों को ताकत मिलेगी लेकिन ध्यान रहे की अर्थराइटिस का दर्द हो तो कोई भी हैवि व्यायाम न करें और एक बार आपने डॉक्टर से सलाह लेने के बाद ही व्यायाम करें|

अर्थराइटिस यानि की जोड़ों का दर्द काफी असहनीय होता है इसलिए अगर आपको शुरुआत में ही इससे जुड़े लक्षण दिखाई दें तो बिना स्माय व्यर्थ किए डॉक्टर से संपर्क करें|

अगर आपने शुरुआती लक्षणो को अनदेखा किया तो इससे समस्या बढ़ सकती है और साथ ही इलाज भी लंबा चलेगा और रिकवरी भी देर से होगी|

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